Saturday, January 17, 2009

कबीर दस जी की उक्ति

चींटी चावल ले चली,बीच मे मिल गई दाल. कहत कबीरा दो ना मिले, इक ले दुजी डाल....अर्थात एक चींटी अपने मुंह मे चावल का दाना ले कर जा र्ही थी,रास्ते मे उसको दाल मिल गई,चींटी को दाल लेने की भी इच्छा हुयी, लेकिन चावल तो मुहं मे है तो दाल केसे रखै, इसी प्रकार हम सुख चेन रखै या इस दुनिया की धन दोलत **** संत कबीर दास जी****

2 comments:

  1. सचमुच प्रशंसनीय

    ---आपका हार्दिक स्वागत है
    चाँद, बादल और शाम

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